13 “हाय खुराजीन! हाय बैतसैदा! जो शक्ति क काम तुमूमा कर्या गया, यदि वो सोर आरू सीदोन हाव कर्या जातो तो गंटो पांगरीन आरू रूखडामा बठीन वो किही क मन फिराय लेये।” 14 पुन न्याय क दाहडो तुमरी दशा छे सोर आरू सीदोन कि दशा सवटो सहने योग्य होयछे। 15 आरू हे कफरनहूम, काय तु सोरग तक उँचा कर्या जासे? तु तो नरक तक सुधो नेचो जाछे।
16 [g]ईशुने आपने चेला छे कयो, “जो तुमरी सोमवता छे, वो मारी सोमवता छे; आरू जो तुमूक तुच्छ जानता छे, वो मखे तुच्छ जानता छे; आरू जो मखे तुच्छ जानता छे, वो मारे मुकलनेवावा क तुच्छ जानता छे।”
18 त्यो ओका सी कयो, “हाव शैतान क बिजली क समान सोरग छे पड़्या हुया देख रया हुता। 19 हाव ने तुम्हे घड़सा आरू विसु क उबा रयने क, आरू दुस्मन कि सारी शक्ति पर हक पाने की; आरू काही समान छे तुम्हे काय अन्याय नी होयछे। 20 तोभी इनासे खुश मा होय कि साहळा तुमरे हुकुम मानता छे, पुन इनासे खुश होय कि तुमरे नाव सोरगदूत मा लिख्यो छे।”
21 तीनी घड़ी वो चुखलो आत्मा मा हुयने खुशी छे भर गया, आरू कयो, “हे बास, सोरग आरू धरती क पोरबु, हाव तारे धन्यवाद करता छे कि तु ने इन वात क ज्ञानी आरू समझदार छे डुकाय राख्या, आरू पोर्या पर प्रगट कर्या। हाव, हे बास, काहकि तुखे यो वारू लाग्यो।”
22 [h]“म्हार बास मेखे सब आप देदलो छे; आरू काही नी जानता कि पोर्य कुन छे केवल बास, आरू बास कुन छे यो भी काही नी जानता केवल पोर्या क आरू वो जिना पर पोर्या ओको प्रगट करनो जुवे।”
23 तव चेला की आरू मुड़कर ऐखलो मा कयो, “धन्य छे वो डुवा, जो यो वात जो तुमू देखता होय देखती छे। 24 काहकि हाव तुमू छे कयता छे कि, घोणा छे भविष्यवक्ता आरू राजा ने जुया कि जो वात तुमू देखता होय देख्या पर नी देखी, आरू जो वात तुमू सोमवता होय सोमव्या पर नी सोमवी।”
26 त्यो ओका सी कयो, “मूसा क व्यवस्था मा काय लिख्या छे? तु कोसो भणता छे?”
27 त्यो उको जवाब देदो, “तु पोरबु आपने यहोवा–भगवान छे आपने सब मन आरू आपने सब जीव आरू आपसी सारी शक्ति आरू आपसी सारी बुध्दी क साथे मोंग राख्यो आरू आपने धडे वावा छे आपने समान मोंग राख्यो।”
28 ईशु ओका सी कयो, “तु ने ठीक जवाब देदो, या कर तो तु जीवतो रवछे।”
29 पुन त्यो आपने आप क न्यायी ठहराने की मरजी छे ईशु छे पुच्छा, “तो मारो धडेवावा कुण छे?”
30 ईशु जवाब दिया, “एक माणुस यरूशलेम छे यरीहो क जाय रया हुता कि डाकु ने घेरकर ओका लुगड़ा उतारीन करता, आरू मारपीट कर उको आदमरतो छुड़ीन चाली गया।” 31 आरू असो हुया कि तीनी मार्ग छे एक पुजारा जाय रया हुता, पुन ओको देख क जाती रयो। 32 इनी रीति छे एक लेवी उना धरती पर आयो, वो भी उको देखीन दिसरे वाट चाली जाय रया हुता। 33 पुन एक सामरि यात्री वाँ आयो आरू उको देखीन तरस खायो। 34 त्यो ओको साथे आवीन ओका घाव पर तेल आरू अंगुर क रस नाखीन पाटू बांधीन, आरू आपसी सवारी पर चढ़ावीन सराय मा ली गया, आरू ओकी सेवा करी। 35 दिसरे दाहडे त्यो दुयी चाँदी क दीनार निकावीन सराय क मालीक क दिया, आरू कयो, “इसकी सेवा करनो, आरू जो काय तारे आरू लागछे, वो हाव पुगीन पर तुके भर देसे।”
36 ईशु ओका सी पुछो, “हिमी तारी समज मा जो डाकु मा घिर गया हुता, इन तीन मा छे ओका धडेवावा कुण ठहराया?”
37 त्यो कयो, “वा जीसने ओको पर दया करी।”
41 पोरबुने ओको जवाब दिया, “मार्था, हे मार्था; तु घोणा वात क करता चिंता करती आरू दुःखी छे। 42 पुन एक वात नक्की छे, आरू ओको वारलो भाग मरियम क निवाड़ लेदो छे; जो ओका सी छिना नी जाछे।”
<- लूका 9लूका 11 ->- a 10:2 मत्ती 9:37,38
- b 10:3 मत्ती 10:16
- c 10:7 1 कुरन्थियो 9:14; 1 तीमुथियुस 5:18
- d 10:10 प्रेरितन 13:51
- e 10:11 मत्ती 10:7-14; मरकुस 6:8-11; लूका 9:3-5
- f 10:12 मत्ती 11:24; मत्ती 10:15
- g 10:16 मत्ती 10:40; मरकुस 9:37; लूका 9:48; यहुन्ना 13:20
- h 10:22 यहुन्ना 3:35; यहुन्ना 10:15
- i 10:25 मत्ती 22:35-40; मरकुस 12:28-34
- j 10:38 यहुन्ना 11:1
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