3 जोसो विटळ लोगहन क योग्य छे, तसो तुमरे मा व्यभिचार, आरू काहय भी भातिन भुण्डला काम, या लोभ न वात तक नी होयनो जुवे। 4 आरू नी लाजवायन, आरू नी विन ओकलाय वात करला हय, काहकि यी वात वारू नी लागे, बाकुन धन्यवाद ही सोमळायनो जुवे। 5 काहकि तुमू यो जानु कि कोय व्यभिचार, या विटळ जनु, या लोभी मानुसन जो मुर्तिपूजक करनिया बराबर छे, मसीह आरू यहोवा–भगवानन राज मा जागु नी होय।
6 कोय तुमूक वायकेड़ा वात छे धुखु नी देय; काहकि इनु कामोन कारन यहोवा–भगवानन रीश हुकुम नी मानेन वाळा पर भड़के। 7 अतरान करीन करता तुमू हेको साती नी होयनो होय।
18 आरू मोंद पीन छाकला मा बनु, काहकि इना सी लुच्चाई हुयो, आरू चुखली आत्मा छे भरायने पाक्का हुयसे जावु। 19 [b]आरू एक हावळ राखीन सात सोंगोत राखजु आरू भजन आरू बढ़ाईन गीत आरू आत्मिक गीत गाया करू, आरू आपसा–आपसा मन मा पोरबुन सामने गावता आरू बढ़ाई करता रवु। 20 आरू सदा सब वात जुगु आपसा पोरबु ईशु मसीहन नाव छे यहोवा–भगवान बासोन करता रवु।
21 आरू मसीहन बीक छे एक दिसरान वात मानता रहवो।
25 [d]ए घर वाळा, आपसी–आपसी लाड़ी साते मोंग राखु, जोसु ईशु मसीह भी मंडळी साते मोंग राखीन आपसा काजे हेर जुगु आप दिदो, 26 कि हेरा वचन क लारे पानी छे उगवाड़िन चुखो बनावे, 27 आरू ओको एक ओसी तेजस्वी मंडळी बनावीन आपसे साते उबी करे, जिना मा नी गुणो, नी झुर्री होय, नी ओसी काय चीज होय, बाकुन त्योखो आरू निर्दोष होय। 28 इने रीते वारू छे, कि घर वाळु आपसी–आपसी घर वाळी छे आपसा डीलोन सारका मोंग राखे, जो आपसी घर वाळी छे मोंग राखे, चो आपसा छे मोंग राखे। 29 काहकि कोय भी कदी आपसा डील सी बैर नी राखलो होय बाकुन हेरो पाळन पुषण करलो छे, जो मसीह भी मंडळी न साते करियो। 30 एका करता कि हामु ओको डिल आरू अंग छे। 31 “इना कारण छे मानुस आपसा माय बास क छुड़ीन आपसी घर वाळी सी मिळीन रहछे, आरू चे दुयू एक डील होयछे।” 32 यो भेद ते मोटो छे; हाव मसीह मंडळी न बारा मा कयतो छे। 33 पर तुमरे मा सी आखा आपसी घर वाळी साते आपसा सारका मोंग राखु, आरू घर वाळी आपसा घर वाळा विजुत करे।
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