7 पर सब क यो ज्ञान नी, पुन काही तो हिमी तक मुर्ती क काही समझने क कारण मुर्ती क सामने बलि करी होयी समान क काही समझीन खाता छे, आरू ओको विवेक निर्बल हुयने क कारण विटळ होय जाता छे। 8 भोजन हामु यहोवा–भगवान क निकट नी पुचाड़तो। यदि हामु नी खाय तो हामरी काही हानि नी, आरू यदि खाय तो काही लाभ नी। 9 पुन सावधान! ओसो नी होय कि तुमरी यो स्वतंत्रता काही निर्बलो क करता ठुकर क कारण होय जाय। 10 काहकि यदि काही तुखे ज्ञानी क मुर्ती क मंदिर मा भोजन करता देखे आरू वो निर्बल जन होय, तो काय ओका मन क प्रयोग मुर्ती क सामने बलि करी होयी समान खाने क साहस नी होय जाछे। 11 इनीये रीति छे तारे ज्ञान क कारण वो निर्बल भाईस ओका करता मसीह मरीन, नष्ट होय जाछे। 12 इनीये प्रकार भाईस क विरोध गुणेहगार करने छे आरू ओको निर्बल मन क चोट पुचाड़ने छे, तुमू मसीह क विरोध गुणेहगार करता होय। 13 इनीये कारण यदि भोजन मारा भाईस क ठुकर खावड़ाया, तो हाव कदी काही रीति छे मास नी खासे, नी होय कि हाव आपने भाईस क करता ठुकर क कारण बनु।
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