1 हर अक्ठी पुजारी मनसेन मसे चुने जथै, अउ जउन भगवान सबंध के बातन हे मनसेन के अगुवाई करै के निता ठहराय जथै, जेखर लग ऊ उपहार अउ पाप के माफ के निता बलि चढावा। 2 ऊ बिना समझदार अउ भुलाय भटके मनसेन के संग कोवड बेउहार के सकथै, काखे ऊ खुदय ढिलवन लग घररेहर हबै। 3 इहैनिता उके अपन पापन के निता अउ ओसनेन मनसेन के पापन के निता बलि चढामैके पडथै। 4 कउनो अपन खुद हइ इज्जत के पद नेहको अपनाथै, पय सबझन हारुन के जसना भगवान के दवारा बोलाय जथै।
5 इहैनिता मसीह अपन मन लग परधान याजक बनके महिमा नेहको पाथै, पय भगवान उके पुजारी बनाइस, फेर अउ ऊ कथै,
6 अउ अक्ठी आने जिघा हे ऊ कथै,
7 यीसु हइ दुनिया अपन देह हे रहत चिल्लाय-चिल्लाय के अउ आंसू बोहोय-बोहोय के भगवान लग, जउन उके मरै लग बचाय सकथै, पराथना अउ बिनती करिस अउ आदरपूरवक समरपन के कारन सुने गइस। 8 टोरवा होय भरमा ऊ दुख सहि के आदेस के मानै के सिखिस, 9 अउ अक बेर सिध्द बन जाय लग उन सबझन के निता जउन ओखर आदेस के मानथै, ऊ सबरोज के मुकति के कारन बन गइस। 10 अउ भगवान के दवारा मलिकिसिदक के जसना उके पुजारी के पद मिलिस।
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