3 कहुं असना झइ होय कि तुम उदास हुइके हिम्मत हार जा, इहैनिता तुम ओखर सुरता करत रइहा, जउन पापिन के एतका घोर बिरोध सहिस। 4 अबे तक तुमही पाप लग लडाई करै हे अपन खून नेहको बहामै के पडिस। 5 का तुम ऊ बचन के बिसर गय हबा जउन भगवान तुमही टोरवा मान लय रहै, मोर टोरवा,
7 तुम जउन दुख सहत हबा, उके परभु के नियम समझा, काखे ऊ एखर परमाड हबै कि भगवान तुमही अपन टोरवा मान के बेउहार करथै अउ कउन असना लरका हबै, जिनही दाय-बाफ के दवारा डांटै नेहको गइस? 8 अगर सब डांट फटकार जेखर सहपारटी सब होथै, अउ तुमही ओसनेन डांट फटकार नेहको करे जातिस, ता तुम उनखर खुद के लरका नेहको पय दूसर के लरका हबा, 9 हमर दाय-बाफ हमही डांट फटकार करथै अउ हम उनखर इज्जत करत रहन, ता हमही कहुं बोहत सही नेहको कि हम अपन आतमिक बाफ के अधीन सुइकार करै के चाही, जेहमा लग हम जीवन पइ। 10 उन तो अपन-अपन समझ के जसना हइ सबरोज के जीवन के निता हमही तइयार करै के उदेस्य लग डांट फटकार करथै, पय भगवान हमर भलाई के निता असना करत हबै, काखे ऊ हमही अपन पवितर के भागीदारी बनामै चाहथै। 11 जउन टेम अनुसासित करे जथै, ऊ टेम अनुसासन खुसी बढिहा नेहको लगथै, बलुक ओखर लग दुख होथै, पय जउन कुछ होय ऊ जउन अनुसासन के अनुभव करथै, उनखर निता फेर नियाइपन धरमी सान्ति अउ बढिहा फल मिलथै।
12 इहैनिता कमजोर हाथ अउ कमजोर घुटवा के मजबूत बनाबा,
18 तुम ऊ डोंगर के लिघ्घो नेहको पहुंचे हबा, जेही तुम छू सका, इछो न तो धंधकत आगी हबै अउ न करिया बादर, न बोहत अंधियार अउ न आंधी बडेरा, 19 इछो न तुरही के आरो अउ न बोलै बाले के असना आरो, जिनखर बात असना रथै कि इस्राएली मनसे उके सुन के उन बिनती करत रथै, कि ऊ फेर हमर लग कुछु झइ कहै, 20 काखे उन हइ आदेस लग घबराय गय रथै, “अगर गोरुवो हइ डोंगर के छूही, ता ऊ पथरा लग मारे जही।” 21 ऊ दरसन एतका भयानक रथै कि मूसा कथै, मै बोहत डर गय हव अउ बोहत कापथो।
22 तुम सियोन डोंगर के लिघ्घो जिन्दा भगवान के नगर, स्वरगी यरुसलेम के लिघ्घो पहुंचे हबै, जिनही लाखन स्वरगदूत मगन खुसी मनाथै। 23 अउ स्वरग के पहिले पइदा सिध्द मनसेन के मंडली अक जिघा होथै, जउन सब के नियाव करैबाले भगवान पूरी तरह लग पाय हर धरमी कामन के आतमा, जेखर नाम स्वरग हे लिखे हर हबै। 24 अउ नबा टीमा के बचामै बाले यीसु बिराजमान हबै, जिनखर छिटकाय हर खून हाबिल के खून लग कहुं बोहत साफ सुथरा बात बोलथै।
25 तुम सचेत रहा, तुम बोलै बालेन के बात सुनै हे अनसुना झइ करा, जउन मनसे भुंइ हे चेतावनी देय बालेन के आरो के अनसुना के दय रहिन, अगर उन नेहको बच सकिन, ता हम कसके बच सकब, अगर हम स्वरग लग चेतावनी देमै बाले के आरो अनसुनी के देब? 26 ऊ टेम ओखर आरो भुंइ के डोलाय देथै, पय अब ऊ हइ टीमा करथै, “मै अक्कै बेर अउ न केबल भुंइ के बलुक बादर के डोलाय दइहों।” 27 अक्कै बेर अउ हइ सब्द लग इसारा मिलत हबै कि जउन चीज डोलाय जही, उन सिरजे हर चीज होय के कारन टर जही अउ जउन नेहको डोलाय जही उन बने रही।
28 हमही जउन राज मिले हबै ऊ नेहको डोलाय जही, इहैनिता हम भगवान के धन्यबाद देयत रही अउ ओखर इक्छा के जसना महिमा अउ इज्जत के संग ओखर आराधना करत रही, 29 काखे हमर भगवान भसम करै बाले आगी हबै।
<- इब्रानिन 11इब्रानिन 13 ->
Languages