6 पय बात हइ हबै जउन चुटु बोथै, ऊ चुटु काटथै अउ जउन बोहत बोथै ऊ बोहत काटथै। 7 इहैनिता जउन अपन मन हे जेतका देय का ठाने हबै, ऊ ओतकै दे, बिना इक्छा के या जबरजस्ती लग नेहको काखे भगवान के पिरिया ऊ हबै, जउन खुसी लग देथै। 8 भगवान सक्तिमान हबै कि ऊ तुमके बोहत जादा अनुगरह दे, कि तुमके सब कुछ मिलत रहै अउ हर निक्खा काम हे तुम्हर लिघ्घो बोहत जादा होय। 9 जसना लिखवरे हबै, जउन कुछु दइस,
10 जउन बोमै बाले के बिजहा अउ खाय बालेन के खाना देथै, ऊ तोके बोमै के निता बिजहा देही, उके बढाही अउ तोके नियाइपन के निक्खा उपज हे बढाही। 11 हइ मेर तुम हर मेर के धन लग धनड्ड करे जइहा, हमर दवारा लग तुम्हर हइ उदारता भगवान के परति धन्यबाद के बारे हे होही। 12 काखे हइ सेबा के पूर करै लग न सिबाय पवितर मनसेन के जरूरत पूर होथै, पय मनसेन के पल्ला[a] लग भगवान के बोहत धन्यबाद होथै। 13 तुम्हर हइ सेबा के साबूत मानत ऊ भगवान के महिमा करही काखे तुम मसीह के भगवान कर संदेस के आदेस मानत स्वीकार करे हबा, अउ तुम सगलू के परति उदार मन के हबा। 14 ऊ तुम्हर निता भगवान लग पराथना करही, ऊ तुम्हर लग माया करथै, काखे ऊ जानथै कि भगवान तुम्हर उप्पर केतका अनुगरह करे हबै। 15 भगवान का, उनखर ऊ दान के निता जउन बयान नेहको करे जा सकथै, भगवान के धन्यबाद होय।
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