6 हइ सगलू घटना हमर निता चेतावनी हबै कि हमही उनखर मेर बेकार चीजन के लालच नेहको करैका चाही। 7 उनखर मसे कुछ मनसे के जसना तुम मूरती पूजा करे बाले झइ बना, जेखर बारे हे हइ लिखवरे हबै, “उन बइठिन खाय पीय के निता अउ उठिन ता खुसी मनामै के निता।” 8 हम उनखर मेर गलत काम झइ करी, जसना कि उनखर मसे कुछ मनसे गलत काम करिन अउ अकै रोज हे तेइस हजार मर गइन। 9 अउ न हम परभु यीसु मसीह के परखी, जसना उनखर मसे केतको मनसे करिन, अउ सपुवा के चाबै लग नास हुइ गइन। 10 अउ न तुम कुनमुना, जसना कि उनखर मसे कुछ मनसे कुनमुनाइन अउ नास करै बाले दूत उनही नास के दइस।
11 उनखर संग जउन गुजरिस हइ घटना चिन्हा हबै, जउन हमर निता सचेत के जसना लिखे गय हबै काखे हम ऊ पीढी हे हबन, जउन दुनिया आखरी टेम के लिघ्घो हबै।
12 इहैनिता ऊ जउन हइ समझाथै कि मै बिस्वास हे मजबूत हबो, ऊ चेतन्न रहै कि कहुं असना झइ होय कि गिर परै। 13 कउ असना परिक्छा तुम्हर हे झइ आबै, जउन सगलू मनसेन के निता सहै लग बाहिर हबै, भगवान बिस्वास हबै, ऊ तुमही कउनो असना परिक्छा हे नेहको परै देही, जउन तुम्हर सहै लग बाहिर होय पय ऊ परिक्छा के संग उपायो करही कि तुम बिस्वास हे मजबूत रही सका।
18 इस्राएलिन के बारे हे सोचा, जउन बेदी हे चढाय हर बलि खथै, का एखर दवारा उन अक्ठी नेहको हुइ जथै? 19 मै हइ नेहको कथो कि मूरती के बलि चढाय हर चीज कउनो मतलब हबै अउ न ऊ मूरती के कउनो मतलब हबै। 20 पय जसना मूसा कर किताब हे कहे गय हबै, “जउन बलि चढाय जथै ऊ भगवान के नेहको, पय भूतन के बलि चढाय जथै।” मै हइ नेहको चाहथो कि तुम भूतन के सहभागी बना। 21 तुम परभु के खोरवा अउ भुतवा के खोरवा दोनोन मसे नेहको पी सकते हबा, तुम परभु के टेबुल अउ भुतवा के टेबुल दोनोन के सहभागी झइ बना। 22 का हम परभु के गुस्सा देमै चाहथन? का हम ओखर लग बोहत बलवान हबन?
25 बजार हे जउन गोस बिकथै, उके तुम अन्तर आतमा के सान्ति के निता बिना पूछे जांचे खाय सकथा, 26 काखे जसना मूसा कर किताब हे कहे गय हबै, “भुंइ अउ ओहमा जउन कुछु हबै ऊ सब परभु के हबै।”
27 जब अबिस्वासिन मसे कउ तुमही नेउता देथै, अउ तुम जायके चाहथा, ता जउन कुछु तुम्हर आगू पोरसे जही उके मन के सान्ति के निता बिना पूछे जांचे खाय सकथा। 28 पय अगर कउ तुम्हर लग कथै, “हइ तो भुतवा के चढाय हर चीज हबै” ता जउन तुमही गुठेय हबै, ओखे कारन अउ मन के कारन उके झइ खइहा। 29 मोर मतलब तुम्हर मन लग नेहको, बलुक दूसर मनसे के मन लग हबै, काखे मोर आजादी दूसर के मन के कारन बाधा नेहको हबै। 30 अगर मै धन्यबाद के पराथना करै के बाद खाना खाय हे सहभागी हुइ गय हबो, ता जउन खाना के निता मै भगवान के धन्यबाद करथो, ओखर कारन कउनो के मोर बुराई करै के हक नेहको हबै।
31 इहैनिता तुम चाहे खा या पिया, जउन कुछु करा सब भगवान के महिमा के निता करा। 32 तुम कउनो के ठोकड के कारन झइ बना, न यहूदिन के निता, न यूनानियन के निता, न भगवान के मंडली के निता। 33 महुं अपन भलाई के निता नेहको, पय दूसर के भलाई के धियान रखके सब बातन हे सब के मगन करै के परयास करथो, जेखर लग उन मुकति पाय सकै।
<- कुरि 9कुरि 11 ->
Languages