4 परम दमधरे, ने कीर्पाळु छे; परम डाहवाय नी करे; परम आपणी बड़ाय नी करे, ने मटकाळु नी हय, 5 चु गलत रीत सी नी चाले, चु आपणी भलाय नी चाहावे, झुंझलावे नी, बुरो नी माने। 6 पाप सी खुसी नी हवे, बाकुन छाचाय सी खुसी हवे। 7 चु आखी वात सेण कर लेय, आखी वातेन भुरसु करे, आखी वातेन आस राखे, आखी वात मां दमधरे।
8 परम कदी टळे नी; भगवानेन अघी सी आवणे वाळी वात हवसे, ती खत्तम हय जासे; बुली हसे, ती जाती रवसे; अक्कल हसे, ची सर जासे 9 काहाकी हामरु अक्कल आधीत छे, ने हामरी भगवानेन अघी सी आवणे वाळी वात आधी छे; 10 बाकुन जत्यार माहान चुखलु आवसे, ती अदेरु सर जासे।
11 जत्यार मे पुर्यु हतलु, ती मे पुर्यान तसु बुलतेलु, ने पुर्यान तसु वीच्यार हतलो, पुर्यान तसों मन हतलो, पुर्यान तसी समज हतली; बाकुन जत्यार मटु हय गुयु ती पुर्यान तसी वात छुड़ देदु। 12 हय हामुक आरस्या मां धुंदळान तसों देखाये, बाकुन हेनी टेमे आंबा-सांबा देखसुन; हीनी टेमे मारु अक्कल अदेरु छे, बाकुन हीनी टेमे असु पुरी रीत सी उळखीस, जसु मे उळखाय गुयलु छे।
13 बाकुन हय भुरसु, आस, परम जे तीनु जलमेन छे, बाकुन हींद्रे मां आखा सी मटु परम छे।
<- 1 कुरींथी 121 कुरींथी 14 ->
Languages